सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस विवाद पर मचा सियासी तूफान

Sat 07-Feb-2026,05:37 PM IST +05:30

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सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस विवाद पर मचा सियासी तूफान Som-Distilleries-License-Suspension-Political-Controversy-MP
  • सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस निलंबन ने मध्यप्रदेश की शराब नीति, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • नकली परमिट, अवैध शराब परिवहन और राजस्व नुकसान से जुड़ा मामला राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक एक्शन में शामिल माना जा रहा है।

Madhya Pradesh / :

Bhopal/ मध्यप्रदेश की शराब नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन के मामले में अब सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बताते हुए आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि प्रशासनिक आदेश को जानबूझकर कमजोर कर सोम ग्रुप को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, जो संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

राजनीतिक आरोपों से गरमाया मामला

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सोम डिस्टिलरीज के खिलाफ कार्रवाई के दौरान संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि जिस तरह से महाधिवक्ता की राय को आदेश में जोड़ा गया, वह स्थापित संवैधानिक परंपराओं के विपरीत है। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके पीछे भ्रष्टाचार या किसी डील की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

दो साल तक दबा रहा मामला, फिर अचानक फैसला क्यों?

कांग्रेस ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि आबकारी आयुक्त द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद लगभग दो वर्षों तक इस मामले को ठंडे बस्ते में क्यों रखा गया। इसके बाद अचानक ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ बनीं कि सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन का फैसला लिया गया। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कुबेर कोठी में पोषण सप्लाई बंद होने के बाद प्रशासन पर कोई दबाव बना, जिसके चलते यह कार्रवाई हुई।

सोम डिस्टिलरीज पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन

गौरतलब है कि नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन के मामले में सोम डिस्टिलरीज समूह के खिलाफ 4 फरवरी 2026 से बड़ा एक्शन लिया गया था। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल के आदेश के तहत सोम डिस्टिलरीज प्रा. लि. सेहतगंज और सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज रोजराचक (रायसेन) के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए थे। इसमें डी-1, एफएल-9 और सीएस-1 जैसे महत्वपूर्ण लाइसेंस शामिल हैं।

न्यायालय की टिप्पणी और राजस्व नुकसान

अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर की अदालत ने नकली शराब परिवहन परमिट से जुड़े आरोपों को सिद्ध माना था। जांच में कूटरचित दस्तावेज, फर्जी बिल्टी और शासन को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाने के प्रमाण सामने आए। अदालत ने कंपनी के निदेशक और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को दोषी ठहराया था, जबकि कई आरोपियों को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

विभागीय कार्रवाई भी सवालों में

हालांकि हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाई, लेकिन लाइसेंस निलंबन पर कोई राहत नहीं दी गई। आबकारी अधिनियम की धारा 31 और 44 के तहत कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया। इसी प्रकरण में आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड को सेवा से बर्खास्त किया गया, जिसे अब तक के अवैध शराब नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।